
प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना सरकार की अब तक की सबसे बड़ी मदद है| फलस्वरूप किसानों के लिए यह अब तक की सबसे कम प्रीमियम दर होगी| शेष भार सरकार द्वारा वहन किया जाएगा 90% से ज्यादा होने पर भी| खाद्यान्न, दलहन, तिलहन फसलों के लिए एक मौसम, एक दर होगी- जिलेवार और फसलवार अलग-अलग दर से अब मुक्ति मिलेगी खरीफ : सिर्फ 2%, रबी : सिर्फ 1.5% पूरा संरक्षण मिलेगा, बीमा पर कोई कैपिंग नहीं होगी और इसके कारण दावा राशि में कमी या कटौती भी नहीं होगी|
पहली बार जल भराव को स्थानीय जोखिम में शामिल किया गया है| पहली बार देश भर में फसल कटाई के बाद चक्रवात एवं बेमौसम बारिश का जोखिम भी शामिल किया गया है| पहली बार सही आकलन और शीघ्र भुगतान के लिए मोबाइल और सैटेलाइट टेक्नालॉजी के व्यापक उपयोग पर जोर दिया गया है| इस योजना से जुड़ना सरल है और सुरक्षा अधिकतम है| इस लेख में प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना से संबंधित पूछे जाने वाले प्रश्नों का उल्लेख किया गया है|
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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न?
प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना से संबंधित पूछे जाने वाले प्रश्न इस प्रकार है, जैसे-
प्रश्न: बीमा क्या है?
उत्तर: बीमा एक बड़ा अप्रत्याशित नुकसान की छोटी संभावना से आपकी रक्षा करने का एक साधन है| यह लोगों को जोखिम को स्थानांतरित करने और साझा करने का एक साधन प्रदान करने की एक तकनीक है, जहां कुछ लोगों को नुकसान उठाना पड़ता है, जो समान जोखिमों के संपर्क में आने वाले कई लोगों द्वारा किए गए छोटे योगदान के माध्यम से संचित धन से होते हैं| बीमा पैसा कमाने का साधन नहीं है, बल्कि किसी व्यक्ति या व्यवसाय को अप्रत्याशित नुकसान की भरपाई करने में मदद करने का एक उपकरण है जो अन्यथा वित्तीय आपदा का कारण बन सकता है|
प्रश्न: फसल बीमा क्या है?
उत्तर: फसल बीमा किसानों की फसलों से जुड़े जोखिम की वजह से हो सकने वाले नुकसान से रक्षा करने का माध्यम है| इससे किसानों को अचानक आए जोखिम या खराब मौसम से फसल को हुए नुकसान की भरपाई की जाती है|
प्रश्न: पीएमएफबीवाई का उद्देश्य?
उत्तर: प्रधान मंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY) का उद्देश्य कृषि क्षेत्र में सतत उत्पादन का समर्थन करना है, जैसे-
1. अप्रत्याशित घटनाओं से उत्पन्न फसल हानि/क्षति से पीड़ित किसानों को वित्तीय सहायता प्रदान करना|
2. किसानों की खेती में निरंतरता सुनिश्चित करने के लिए उनकी आय को स्थिर करना|
3. किसानों को नवीन और आधुनिक कृषि पद्धतियों को अपनाने के लिए प्रोत्साहित करना|
4. कृषि क्षेत्र को ऋण का प्रवाह सुनिश्चित करना; जो किसानों को उत्पादन जोखिमों से बचाने के अलावा खाद्य सुरक्षा, फसल विविधीकरण और कृषि क्षेत्र की वृद्धि और प्रतिस्पर्धात्मकता में योगदान देगा|
प्रश्न: मौसम आधारित फसल बीमा क्या है?
उत्तर: मौसम आधारित फसल बीमा का उद्देश्य बीमित किसानों को वर्षा, तापमान, पाला, आर्द्रता आदि जैसे मौसम के प्रतिकूल परिस्थितियों की घटनाओं के परिणामस्वरूप प्रत्याशित फसल हानि के कारण वित्तीय नुकसान की संभावना के खिलाफ कठिनाई को कम करना है|
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प्रश्न: इस समय कौन कौन सी फसल बीमा योजनाएं चल रही हैं?
उत्तर: इस समय राष्ट्रीय कृषि बीमा योजना (NAIS), संशोधित राष्ट्रीय कृषि बीमा योजना (MNAIS), मौसम आधारित फसल बीमा योजना (WBCIS) एवं नारियल पाम बीमा योजना (CPIS) चल रही हैं| राष्ट्रीय कृषि बीमा योजना और संशोधित कृषि बीमा योजना को रबी 2015-16 के बाद बंद कर किसानों को अधिक सुरक्षा देने के लिए अब खरीफ 2016 से प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY) शुरू की जा रही है|
प्रश्न: पहले की योजनाओं एनएआईएस और एमएनएआईएस को रबी 2015-16 के बाद क्यों बंद किया गया है?
उत्तर: इन योजनाओं में कुछ ऐसे प्रावधान थे, जिनसे किसानों को अधिक प्रीमियम देने के बावजूद नुकसान का सही मुआवजा नहीं मिल पा रहा था| बीमित प्रीमियम ज्यादा होने पर तो प्रीमियम पर कैपिंग के कारण बीमा की मूल राशि घटा दी जाती थी, इसके अलावा ज्यादा जोखिम वाले जिलों में ज्यादा प्रीमियम देना पड़ता था, नजदीकी जिलों में प्रीमियम की दर अलग अलग होती थी एवं किसानों के दावों के भुगतान में काफी देर होती थी| ये योजनाएं किसान के लिए ज्यादा मददगार और फायदेमंद नहीं थीं| इस कारण रबी 2015-16 के बाद इन्हें बंद किया गया है|
प्रश्न: नई योजना, प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY) में किसानों को ज्यादा से ज्यादा कितना प्रीमियम देना होगा?
उत्तर: इस योजना में किसानों को पुरानी सभी योजनाओं की तुलना में सबसे कम प्रीमियम राशि देनी होगी| किसानों को प्रीमियम की रकम का बोझ अब महसूस नहीं होगा| इस बोझ की वजह से पहले बहुत से किसान बीमा नहीं कराते थे और उन्हें नुकसान होने पर कोई भरपाई नहीं मिल पाती थी| नई योजना में अब सभी फसलों के लिए खरीफ में ज्यादा से ज्यादा 2 फीसदी और रबी में ज्यादा से ज्यादा 1.5 फीसदी बीमा दर रखी गयी है| इसके अलावा सालाना बागवानी/व्यावसायिक फसल के लिए प्रीमियम की दर ज्यादा से ज्यादा 5 फीसदी की गई है| ये दरें पहले से काफी कम हैं|
प्रश्न: क्या पहले की योजनाओं की तरह इस नई योजना में भी किसानों को कैपिंग की समस्या का सामना करना पड़ेगा?
उत्तर: नहीं, पहले की योजनाओं में अधिक प्रीमियम होने पर बीमित राशि की सीमा तय करने से नुकसान होने पर भरपाई की रकम भी कम हो जाया करती थी, इसलिए नई योजना में इस प्रावधान को समाप्त कर दिया गया है| अब किसानों को बीमित राशि की पूरी रकम के अनुसार पूरा हर्जाना मिल सकेगा|
प्रश्न: फसलों का कितना कवरेज?
उत्तर: 1. खाद्य फसलें (अनाज, बाजरा और दालें), 2. तिलहन, 3. वार्षिक वाणिज्यिक / वार्षिक बागवानी फसलें|
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प्रश्न: प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना बीमित राशि/कवरेज सीमा क्या हैं?
उत्तर:-
1. ऋणी और गैर-ऋणी दोनों किसानों के लिए प्रति हेक्टेयर बीमा राशि जिला स्तरीय तकनीकी समिति द्वारा तय किए गए वित्त के पैमाने के समान और बराबर होगी, और एसएलसीसीसीआई द्वारा पूर्व-घोषित और अधिसूचित की जाएगी| वित्त के पैमाने की कोई अन्य गणना लागू नहीं होगी| व्यक्तिगत किसान के लिए बीमा राशि किसान द्वारा बीमा के लिए प्रस्तावित अधिसूचित फसल के क्षेत्र से गुणा करके प्रति हेक्टेयर वित्त के पैमाने के बराबर है| ‘खेती के तहत क्षेत्र’ हमेशा ‘हेक्टेयर’ में व्यक्त किया जाएगा|
2. सिंचित और असिंचित क्षेत्रों के लिए बीमा राशि अलग-अलग हो सकती है|
प्रश्न: इस योजना के तहत कौन-कौन से जोखिम कवर किए गए हैं?
उत्तर: प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत निम्नलिखित जोखिम कवर किए गए हैं, जैसे-
उपज नुकसान के आधार पर: इस योजना में आग लगने के अलावा बिजली गिरने, तूफान, ओला पड़ने, चक्रवात, अंधड़, बवंडर, बाढ़, जलभराव, जमीन धंसने, सूखा, खराब मौसम, कीट एवं फसल को होने वाली बीमारियां आदि जोखिम से फसल को होने वाले नुकसान को शामिल करके एक ऐसा बीमा कवर दिया जायेगा जिसमें इनसे होने वाले सारे नुकसान से सुरक्षा प्रदान की जाएगी|
संरक्षित बुआई के आधार पर: अगर बीमित किसान बुआई/रोपाई के लिए खर्च करने के बावजूद खराब मौसम की वजह से बुआई/रोपाई नहीं कर सकते तो वे बीमित राशि के 25 प्रतिशत तक नुकसान का दावा ले सकेगें|
आपदा से: फसल कटाई के बाद रखी फसल को चक्रवात, बेमौसम बारिश और स्थानीय आपदा जैसे ओलों, जमीन धंसने और जल भराव से होने वाले नुकसान का अंदाजा प्रभावी खेत के आधार पर किया जायेगा और इसके अनुसार किसानों के नुकसान का आकलन करके दावे तय किये जाएंगे|
प्रश्न: इस योजना के तहत कौन-कौन से राज्य भागीदार हैं?
उत्तर: यह प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना सभी राज्य सरकारों और संघ शासित क्षेत्रों के लिए स्वैच्छिक है| अतः इस योजना में सभी राज्य और संघ शासित क्षेत्र शामिल हो सकते हैं|
प्रश्न: इस योजना के तहत कौन-कौन से किसान किन-किन फसलों का बीमा करा सकते हैं?
उत्तर: राज्य सरकारों/संघ शासित क्षेत्रों द्वारा तय किए गए इलाके में तय की गई फसल जो कि अनाज, खाद्यान, तिलहन, सालाना व्यावसायिक और बागवानी फसल हो सकती है, उगाने वाले किसान बीमा करा सकते हैं| नई बीमा योजना तय किए गए क्षेत्र में केसीसी खाता धारक किसानों (जिन्हंक ऋणी किसान कहा जाता है) के लिए अनिवार्य है तथा अन्य सभी किसान अगर चाहें तो बीमा का लाभ ले सकते हैं|
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प्रश्न: इस योजना के तहत किसान बीमा कैसे ले सकता है?
उत्तर: प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत बैंक, केसीसी खाता (जिन्हें ऋणी किसान कहा जाता है) धारक किसानों के लिए जरूरी प्रीमियम, बीमा कम्पनियों के पास अपने आप भेज देते हैं और उन किसानों का बीमा हो जाता है| अन्य सभी किसान निकटतम बैंक या तय की गई बीमा कंपनी के स्थानीय एजेंट को प्रीमियम का भुगतान करके फसल बीमा करा सकते हैं|
प्रश्न: क्या नई फसल बीमा योजना में खेतवार नुकसान का आकलन करने का नियम है?
उत्तर: नई प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में यह नियम बनाया गया है कि स्थानीय आपदाओं जैसे ओला पड़ने, जमीन धंसने और जलभराव से नुकसान होने पर योजना में खेतवार नुकसान का आकलन किया जाएगा| ठीक उसी तरह फसल कटाई के बाद खेत में पड़ी हुई फसल को 14 दिन के भीतर चक्रवात और बेमौसम बरसात से नुकसान होने पर भी खेतवार आकलन करके भुगतान करने का नियम बनाया गया है|
प्रश्न: क्या इस योजना में खराब मौसम के कारण बुआई/रोपाई न कर पाने पर नुकसान का मुआवजा देने का प्रावधान है?
उत्तर: हाँ, बीमा की गई फसल की खराब मौसम के कारण बुआई / रोपाई न कर पाने पर, बीमा मूल्य राशि का 25 फीसदी तक सीधे किसान के खाते में जमा करने का प्रावधान इस योजना में किया गया है|
प्रश्न: क्या फसल बीमा में नुकसान के दावों के भुगतान को जल्द से जल्द करने के लिए कोई उपाय किए गये हैं?
उत्तर: नयी योजना में स्मार्टफोन से फसल कटाई आकलन की तस्वीरें खींचकर सर्वर पर अपलोड की जायेंगी जिससे फसल कटाई के आंकड़े जल्द से जल्द बीमा कंपनी को मिल सकेगें| इससे दावों का भुगतान करने में लगने वाले समय को काफी कम किया जायेगा| रिमोट सेंसिंग और ड्रोन जैसी तकनीक के इस्तेमाल से फसल कटाई प्रयोग की संख्या को कम करने में और नुकसान के आकलन में सहायता मिलेगी|
प्रश्न: इस योजना के तहत बीमा इकाई क्या है?
उत्तर: प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना क्षेत्रीय दृष्टिकोण आधार पर अमल में लाई जायेगी| मुख्य फसलों के लिए बीमा इकाई ग्राम/ग्राम पंचायत स्तर पर होगी और अन्य फसलों के लिए बीमा इकाई राज्य सरकार द्वारा तय की जायेगी और यह ग्राम/ग्राम पंचायत से बड़े आकार की भी हो सकती है|
प्रश्न: इस योजना के तहत किसानों के लिए बीमित राशि क्या होगी?
उत्तर: प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत बीमित राशि जिला स्तर तकनीकी समिति (डीएलटीसी) द्वारा उस फसल के लिए तय वित्त पैमाने के बराबर होगी|
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प्रश्न: पूर्व की मौसम आधारित फसल बीमा योजना में क्या संशोधन किया गया है?
उत्तर: मौसम आधारित फसल बीमा योजना को संशोधित करके प्रशासनिक मानक और परिचालन के प्रावधान अब पीएमएफबीवाई के समान कर दिए गए हैं जैसे: इस योजना के तहत अब किसानों के हिस्से की प्रीमियम दर को सभी फसलों के लिए खरीफ में ज्यादा से ज्यादा 2 प्रतिशत तथा रबी में ज्यादा से ज्यादा 1.5 प्रतिशत किया गया है और वार्षिक बागवानी-वाणिज्यिक फसल के लिए किसान की प्रीमियम दर को ज्यादा से ज्यादा 5 प्रतिशत कर दिया गया है तथा बीमित राशि पर कैपिंग का प्रावधान भी हटा दिया गया है ताकि किसानों को पूर्ण बीमित राशि की क्षतिपूर्ति मिल सके|
प्रश्न: प्रधानमंत्री फसल बीमा प्रदान करने वाली कितनी कंपनियां हैं?
उत्तर:-
1. कृषि बीमा कंपनी
2. चोलामंडलम एमएस जनरल इंश्योरेंस कंपनी
3. रिलायंस जनरल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड
4. बजाज आलियांज
5. फ्यूचर जेनराली इंडिया इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड
6. एचडीएफसी एर्गो जनरल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड
7. इफको टोकियो जनरल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड
8. यूनिवर्सल सोम्पो जनरल इंश्योरेंस कंपनी
9. आईसीआईसीआई लोम्बार्ड जनरल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड
10. टाटा एआईजी जनरल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड
11. एसबीआई जनरल इंश्योरेंस
12. यूनाइटेड इंडिया इंश्योरेंस कंपनी|
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