गेहूं एवं जौ में सूत्रकृमि प्रबंधन, सूत्रकृमियों को फसलों के अदृश्य शत्रु की संज्ञा दी गई हैं| इन्हें खुली आंखों से देखना सम्भव नहीं है तथा ये फसलों को बहुत नुकसान पहुंचाते हैं| सूत्रकृमियों द्वारा फसलों को औसतन 15 से 20 प्रतिशत नुकसान होता है| उत्तरी भारत में यह समस्या सबसे गंभीर है, लगभग 60 [Read More] …
Agriculture
जौ में समेकित कीट नियंत्रण कैसे करें | जौ फसल बचाव के उपाय
आप सभी बन्धु जानते है की हम प्राचील काल से ही कृषि प्रधान देश रहा है| जौ की फसल उत्तर भारत के अधिकांश प्रदेशों में उगाई जाती है| कीटों, रोगों और सूत्रकृमियों के कारण जौ में 10 से 30 प्रतिशत तक उत्पादन की हानि हो जाती है| जिससे दाना और बीज की गुणवत्ता भी खराब [Read More] …
सस्य क्रियाओं द्वारा कीट नियंत्रण: लागत कम और उत्पादन अधिक
सस्य क्रियाओं द्वारा कीट नियंत्रण, किसान अपना उत्पादन तथा आमदनी बढ़ाने के लिए फसल उत्पादन की समरत विधियों में तकनीकों का उपयोग करता है| इसके अन्तर्गत फसल की किस्म, बुआई का समय एवं विधि, भू–परिष्करण, खेत और खेती की स्वच्छता, उर्वरक प्रबंधन, जल प्रबंधन, खरपतवार प्रबंधन, कीट प्रबंधन और कटाई का समय आदि का समावेश [Read More] …
समेकित कृषि प्रणाली क्या है? इसे कैसे बढ़ सकती है किसानों की आय
समेकित कृषि प्रणाली, भारत में कृषि योग्य भूमि के औसत आकार में निरंतर गिरावट आ रही है, जो एक खतरे का संकेत है| छोटे किसान खेती से होने वाले आय से अपनी आवश्यकताओं की पूर्ति कर पाने में असमर्थ हैं| आकड़ों के अनुसार भारत की आधी से ज्यादा जनसख्या निर्धन है, यह रिस्थति दिन-प्रतिदिन गंभीर [Read More] …
चन्द्रशूर की उन्नत खेती: किस्में, बुआई, सिंचाई, देखभाल, पैदावार
रबी मौसम में बारानी और सिंचित स्थितियों में खेती किये जाने वाला चन्द्रशूर एक बहुत गुणकारी तथा लाभकारी औषधीय पौधा है| सरसों ( क्रुसीफेरी) कुल से संबन्धित इस पौधे को हालिम, हलम, असालिया, रिसालिया, असारिया, हालू, अशेलियो, चनसूर, चन्द्रिका, आरिया, अलिदा, गार्डन-कैस और लेपिडियम सेटाइवम आदि नामों से भी पुकारा जाता है| इसे उत्तर प्रदेश, [Read More] …
मसाले वाली फसलों को अधिक पैदावार के लिए रोगों से ऐसे बचाए
मसालों का भोजन में विशेष स्थान है| मसाले जहां भोजन को स्वादिष्ट बनाते हैं वहीं शरीर के लिए आवश्यक जैव रसायन भी उपलब्ध कराते हैं| जिससे भोजन शीघ्र पचता है, व शरीर स्वस्थ रहता है| जीवन के लिए उपयोगी इन मसाले की फसलों का रोगों से बचाव करना बहुत जरूरी है| सौंफ, अजवायन, जीरा एवं [Read More] …
पाले एवं सर्दी से फसलों का बचाव कैसे करें; जाने सुरक्षा के उपाय
सर्दी के मौसम में उगाई जाने वाली अधिकांश फसलें सर्दियों में पड़ने वाले पाले एवं सर्दी से प्रभावित होती है| सब्जी और फल इस पाले के प्रति संवेदनशील होते है, जबकि खाद्यान्न फसलें अपेक्षाकृत कम प्रभावित होती है| पाला पड़ने से फसलों को आंशिक या पूर्ण रूप से हानि पहुंचती है| जबकि अत्यधिक पाले एवं [Read More] …
गन्ने में भरपूर पैदावार के लिए न होने दें लौह तत्व की कमी
गन्ने की बढ़वार के लिए 17 पोषक तत्वों की आवश्यकता होती है, जिनमें लोहा भी एक तत्व है| लगातार सघन खेती और खादों के असंतुलित प्रयोग से भारत की भूमि में जैविक पदार्थ एवं आवश्यक सूक्ष्म पोषक तत्व जैसे लोहे की कमी हो रही है| गन्ने की अधिक उपज प्राप्त करने के लिएआवश्यक पोषक तत्व [Read More] …
जौ के प्रमुख रोग की रोकथाम कैसे करें | जौ फसल में रोग नियंत्रण
जौ हमारे देश के शुष्क व अर्द्धशुष्क क्षेत्रों में उगाई जाने वाली प्रमुख रबी फसलों में से एक है| इसे कम पानी एवं नमकीन भूमि में उगाया जा सकता है| जौ फसल को मुख्य रूप से पशुओं को दाने के रूप में खिलाया जाता है| लेकिन अब माल्ट उद्योगों के स्थापित होने से उद्योग जगत [Read More] …
बासमती धान में बकानी रोग की रोकथाम | बकानी रोग क्या है?
धान भारतवर्ष की प्रमुख खाद्यान्न फसल है| देश के कृषि योग्य भूमि के 30 प्रतिशत हिस्से में धान की खेती होती है| बासमती धान की खेती से अधिक लाभ के कारण, बासमती धान के उत्पादन में एक महत्वपूर्ण बदलाव देखने को मिला है| अपने अद्भुत गुणों एवं दानों की पकने की गुणवत्ता के कारण अन्तर्राष्ट्रीय [Read More] …