क्षारीय एवं लवणीय मिट्टी प्राचीन समय से ही भारत में ऊसर (बंजर) या रेह के नाम से जानी जाती है| आज से लगभग 157 वर्ष पहले, नहर द्वारा सिंचाई शुरू होने के उपरान्त से इस समस्या की गम्भीरता को महसूस किया गया, पहली बार एक किसान ने सरकार का ध्यान इस समस्या की ओर आकर्षित [Read More] …
Agriculture
गेहूं की उत्तम पैदावार के लिए मैंगनीज का प्रबंधन कैसे करें?
गेहूं की उत्तम पैदावार के लिए मैंगनीज का प्रबंधन, हमारे देश में गेहूं, धान के बाद दूसरी सबसे महत्वपूर्ण खाद्यान्न फसल है| भारत में आज कुल 8.59 करोड़ टन से अधिक गेहूं का उत्पादन हो रहा है| गेहूं की औसत उत्पादन 28.0 क्विंटल प्रति हेक्टेयर है, जो कि अनुसंधान संस्थानों के फार्मों पर प्राप्त तथा [Read More] …
बीज उत्पादन की विधियां क्या है? | खेत में बीज कैसे तैयार करें?
बीज उत्पादन की विधियां, जैसा कि हम सभी जानते हैं, कि किसान को खेती करने के लिए बहुत से सामग्री की आवश्यकता होती है| उन सामग्री में एक बहुत ही अहम सामग्री है, बीज क्योंकि जब हमारा बीज ठीक रहेगा तभी फसल उत्पादन दर अच्छी होगी| आमतौर पर यह देखा जा रहा है, कि किसान [Read More] …
धान व गेहूं फसल चक्र में जड़-गांठ सूत्रकृमि रोग की रोकथाम कैसे करें
धान व गेहूं फसल चक्र में जड़-गांठ सूत्रकृमि, धागे की तरह के पादप परजीवी सूक्ष्मजीव होते हैं, जो फसलों की जड़ों पर परजीवी के रूप में रहकर पौधों के भोजन पर ही अपना जीवन निर्वाह करते हैं| सूत्रकृमि पौधों की जड़ों में घाव उत्पन्न करके नई प्रकार की कोशिकायें बनाते हैं| जिससे पौधों में खाद्य [Read More] …
जलवायु परिवर्तन कृषि को प्रभावित कैसे कर रहा है; जाने प्रभाव
जलवायु परिवर्तन, औद्योगिकीकरण तथा बढ़ते वाहनों की संख्या में लगातार वृद्धि हो रही है| परिणामस्वरूप बढ़ती ग्रीन हाउस गैसों के उत्सजर्न से वैश्विक तापमान में वृद्धि और जलवायु परिवर्तन से समस्त विश्व चिंतित है| चिंता का विषय इसलिए भी है, क्योंकि भारत एक कृषि प्रधान देश है, एवं भारतीय अर्थ व्यवस्था की आधारशिला खेती ही [Read More] …
फ्लाई ऐश (राख) का खेती में महत्व: आवश्यकता और मिट्टी में उपयोग
फ्लाई ऐश (राख) का खेती में महत्व, हमारा देश खेती प्रधान देश है| जिसमें अधिकांश 70 प्रतिशत जनसंख्या कृषि पर निर्भर है| हमारे देश की बढ़ती जनसंख्या को देखते हुए खेती में उपज में वृद्धि बहुत ही आवश्यक है| खेती में लगातार विकास और उपज में वृद्धि सिर्फ वैज्ञानिक प्रबंधन के द्वारा ही संभव है| [Read More] …
कपास फसल की विभिन्न अवस्थाओं के प्रमुख कीट और रोगों का प्रकोप
भारत में कपास फसल का संपूर्ण क्षेत्रफल लगभग 10.26 मिलियन हेक्टेयर है| भारत में बी.टी. कपास फसल की उत्पादकता केवल 580 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर है| जबकि विश्व की सामान्य उत्पादकता 740 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर है| कपास की फसल की कम पैदावार के लिए जैविक तथा भौतिक कारण उत्तरदायी हैं| जैविक कारणों में कीट, पतंगे कपास [Read More] …
कपास में एकीकृत कीट प्रबंधन | कपास में कीट नियंत्रण कैसे करें
कपास में एकीकृत कीट प्रबंधन, कपास हमारे देश की एक प्रमुख नकदी फसल है| औद्योगिक एवं निर्यात की दृष्टि से कपास हमारे देश की की अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है| देश के कुल घरेलू उत्पाद में इसका योगदान 3 प्रतिशत, औद्योगिक उत्पाद में 14 प्रतिशत, रोजगार उपलब्धता में 18 प्रतिशत और निर्यात में लगभग [Read More] …
स्वस्थ नर्सरी द्वारा बासमती धान की पैदावार बढ़ाये
स्वस्थ नर्सरी द्वारा तैयार पौध धान या चावल जैसी मुख्य फसल की बढ़वार और विकास का मूल आधार है| खेत में पौधों की उचित संख्या जो स्वस्थ एवं पुष्ट पौध पर निर्भर करती है, स्वस्थ पौधों की रोपाई करने से चावल की उच्च उपज मिलती है एवं चावल उगाने वाले कृषकों को अधिक लाभ प्राप्त [Read More] …
बारानी क्षेत्रों की फसल उत्पादकता वृद्धि हेतु उन्नत तकनीक
हमारे देश का लगभग 55 से 60 प्रतिशत कृषि क्षेत्र बारानी क्षेत्रों या असिंचित है और भारतीय अर्थव्यवस्था काफी हद तक मानसून पर निर्भर करती है| भारतीय उपमहाद्वीप में लगभग 70 प्रतिशत वर्षा दक्षिण-पश्चिमी मानसून के समय मात्र चार महीने में होती है| इस वर्षा का वितरण असमान होता है| देश के 13 राज्यों के [Read More] …