लवणीय एवं क्षारीय निम्न गुणवत्ता वाला जल, वह जल है, जो कुछ निश्चित गुण रखता है| जिसके कारण उसका कृषि में उपयोग करने पर वह कुछ समस्या पैदा कर देता है, जैसे मृदा की लवणीय एवं क्षारीय को बढ़ा देना, पैदावार को घटा देना इत्यादि| निम्न गुणवत्ता वाले जल में लवणीय एवं क्षारीय जल, औद्योगिक [Read More] …
Agriculture
फसलों या पौधों में जरूरी पोषक तत्वों की आपूर्ति के लिए खादें
समस्त जीवधारियों की तरह फसलों या पौधों को भी भोजन की आवश्यकता होती है, परन्तु पौधे इसके लिए किसी बाहयकरण कारक पर निर्भर नहीं हैं| प्रकृति में फसलों या पौधों में यह क्षमता पाई जाती है, कि वे अपने भोजन का निर्माण स्वयं कर सकते हैं| फसलों या पौधों के लिए आवश्यक खनिज तत्वों की [Read More] …
मूंग की बसंतकालीन खेती: किस्में, बुवाई, खाद तत्व, देखभाल, उपज
मूंग की बसंतकालीन उन्नत खेती, संसार में दलहनी फसलों का सबसे अधिक क्षेत्रफल भारत में है| फसल पद्धतियों के विकास में दलहनी फसलों का महत्वपूर्ण योगदान रहा है| एक और ये भूमि की उर्वरा शक्ति को बनाए रखती हैं, दूसरी और पोषक आहार के रूप में दाल हमारे भोजन का प्रमुख हिस्सा है| दाल के [Read More] …
चने की अधिक पैदावार के लिए आवश्यक सुझाव: आधुनिक टिप्स
चना एक दलहनी फसल है, और भारत इसका प्रमुख उत्पादक है| लेकिन चने की अधिक पैदावार से हमारे किसान भाई जानकारी के या संसाधनो आभाव काफी पीछे है| इस लेख में चने की अधिक पैदावार लेने के लिए आवश्यक बिंदू सुझाएँ गये है, जिनको उपयोग में लाकर कृषक अपनी चने की खेती से सफलतापुर्वक अच्छी [Read More] …
गेहूं की पैरा विधि से खेती: किस्में, बुवाई, खाद, देखभाल और उत्पादन
गेहूं की पैरा विधि से खेती, गेहूं ऐसी फसल है, जो सभी प्रकार के जलवायु में अच्छी पैदावार देती है| वैसे तो यह प्रमुख रूप से ठण्डे प्रदेशों में पैदा की जाती थी, परन्तु कृषि वैज्ञानिकों के प्रयासों से यह अब पूरे विश्व में पैदा की जाने लगी है| वर्तमान युग में इसे खाद्यान्नों के [Read More] …
चना उत्पादन कम होने के मुख्य कारण: जाने महत्वपूर्ण बिंदु
भारत चना उत्पादन में प्रमुख स्थान रखता है, लेकिन कुछ प्रमुख कारणों से हम क्षेत्रफल के हिसाब से अन्य देशों से चना उत्पादन में पिछड़े है, इस लेख में भारत में चना के उत्पादन और उत्पादकता को प्रभावित करने वाले प्रमुख अवरोधकारी तत्वों को संक्षिप्त रूप में निम्न प्रकार से वर्णित किया जा रहा है, [Read More] …
चने की उन्नत किस्में | चना की किस्में | चने की अच्छी किस्म कौन सी है
चने की उन्नत किस्में, दलहनी फसलों में चना एक महत्वपूर्ण फसल है| चने के दानों में 21 प्रतिशत प्रोटीन, 62 प्रतिशत कोर्वोहाइड्रेट, रेशा, वसा, कैल्श्यिम, लोहा और हरे चने में प्रचुर मात्रा में विटामिन “सी” पाया जाता है| चना दुधारू पशुओं और विशेषकर घोड़ों को खिलाने के काम आता है| इसका भूसा नमकीन होने के [Read More] …
चना के प्रमुख कीट की रोकथाम कैसे करें? | चने में कीट नियंत्रण
चना भारत की प्रमुख दलहनी फसल है, लेकिन इसकी गुणवत्ता चना के प्रमुख रोगों के प्रकोप से बहुत प्रभावित होती है| यह प्रोटीन का एक बहुत अच्छा स्रोत होने के कारण चना के रोगों के प्रति बहुत संवेदनशील होती है| भारत में चना के प्रमुख कीट बहुत है, लेकिन इस लेख में हम उन कुछ [Read More] …
चना के प्रमुख रोग की रोकथाम | चने में रोग नियंत्रण कैसे करें?
चना की गुणवत्ता रोग एवं व्याधियों के प्रकोप से बहुत प्रभावित होती है| यह प्रोटीन का एक बहुत अच्छा स्रोत होने के कारण चना की खेती रोग एवं व्याधियों के प्रति बहुत संवेदनशील होती है| आमतौर पर उत्तरी, उत्तर-पूर्व और पूर्वी भाग में पत्ती वाले रोग का प्रकोप रहता है| जबकि मध्य और मैदानी भागों [Read More] …
जीरो टिलेज विधि से गेहूं की खेती: किस्में, बुवाई, देखभाल, पैदावार
जीरो टिलेज मशीन से गेहूं की बुवाई उत्तरी भारत में धान-गेहूं एक प्रमुख फसल चक्र है| इसके अंतर्गत लगभग उत्तरी भारत का पूरा सिंचित क्षेत्र आता है| उत्तर भारत में निचले सिंचित क्षेत्र में अधिकांशत: गेहूं बोया जाता है। यहाँ देर से धान कटता है, और खेत तैयार करते-करते गेहूं की बुआई दिसंबर के अंत [Read More] …