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खजूर की किस्में: विशेषताएं, फल अवस्था और पैदावार

February 12, 2026 by Bhupender Choudhary Leave a Comment

खजूर की उन्नत किस्में: खजूर के फल पोष्टिक तत्वों से भरपूर और स्वादिष्ट होते है| फल के गुदे में जल ( 20 प्रतिशत), शर्करा ( 60 प्रतिशत), रेशे (2.5 प्रतिशत ) प्रोटीन (2 प्रतिशत), वसा, पोटेशियम, कैलिशयम, तांबा, मैग्नीशियम, क्लोरिन, गंधक, फासफोरस तत्व पाए जाते है| विटामिन ए व बी भी उपलब्ध होते है| कार्बोहाइड्रेट प्रचुरता के कारण 1 किग्रा ताजा फलों से लगभग 3150 कैलोरी उर्जा प्राप्त होती है| फलों को कच्चा (ताजा फल), मुलायम (पिण्ड खजूर) एवं चुनिंदा किस्मों को सुखाकर (छुआरा ) उपयोग में लाया जाता है| खजूर की पतीयां झाडू, पंखे व रस्सी बनाने के काम आती है|

खजूर में पोष्टिक खनिज लवणों की अधिकता होने के कारण यह शरीर में रोगरोधी क्षमता पैदा करती है| यह कैंसर रोग की तीव्रता को घटाती है| इसके प्रयोग से पाचन शक्ति बढती है| कमी व अंधापन जैसी बीमारियों से बचाता है| खांसी जुखाम बुखार को कम करने में बहुत उपयोगी है हृदय संबधित बीमारियों तथा डायबीटिज को कम करने में सहायक है| खजूर की उन्नत और अच्छी क्वालिटी वाली किस्मों की विशेषताएं, फल अवस्था और पैदावार का विवरण इस प्रकार है|

यह भी पढ़ें- खजूर की खेती: जलवायु, किस्में, प्रबंधन, देखभाल और पैदावार

खजूर की उन्नत किस्में

खजूर की किस्मों की उपयोगिता के अनुसार वर्गीकरण, इस प्रकार है, जैसे-

उपयोगकिस्मों के अपेक्षित गुणकिस्में
डोका फल खाने के लिएडोका अवस्था में फल कसैले न हों व मीठेबरही, हलावी, खलास, खुनेजी और सेवी
छुहारे बनाने के लिएफलों में गूदे की मोटाई अधिक होमैडजूल, जाहिदी,खदरावी और शामरान
पिण्ड खजूर बनाने के लिएफल तुड़ाई के समय पूर्ण डोका/डांग अवस्था प्राप्त कर लेंमैडजूल, जाहिदी, खदरावी, हलावी, खलास, शमरान और जगलूल
खजूर रस एवं परिरक्षित उत्पाद बनाने हेतुफलों का रंग आकर्षक लाल हो तथा उनमें महक होनी चाहिएहलावी, जगलूल, सूरिया और अत्शोक

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खजूर की प्रमुख किस्मों की विशेषताएं और पैदावार

बरही: इस किस्म की उत्पत्ति बसरा, इराक से हुई हैं| इस किस्म के फल मध्यम आकार के और डोका अवस्था में सुनहरे पीले रंग के होते हैं| इस किस्म के डोका अवस्था से पूर्व के हरे फल भी प्रायः कसैलें नही होते हैं| फल का औसत वजन 13.6 ग्राम, कुल घुलनशील ठोस पदार्थ 31.5 प्रतिशत होता है| यह मध्यम देरी से पकने वाली किस्म हैं| इसके डोका अवस्था में फल मीठे एवं स्वादिष्ट होते हैं जो इसकी अन्य किस्मों से अलग पहचान बनाते हैं| इसकी औसत पैदावार 200 किलोग्राम प्रति पौधा तक हैं| इस किस्म से सकर्स का उत्पादन कम सामान्यतः 3 से 5 होता है|

उपज: इसकी औसत पैदावार 200 किलोग्राम प्रति पौधा तक हैं|

मैडजूल: इस किस्म की उत्पत्ति मोरक्को से हुयी है| इसके फलों का रंग डोका अवस्था में पीला नारंगीपन लिये हुए होता हैं, लेकिन इस अवस्था में फल कसैले होते है| इसके फल आकार में काफी बड़े 20 से 40 ग्राम वजन के एवं आकर्षक होते हैं| फल का औसत वनज 22.80 ग्राम, कुल घुलनशील ठोस पदार्थ 34.5 प्रतिशत तथा फल देरी से पककर तैयार होते है| इस किस्म के फलों में वर्षा से कम नुकसान होता हैं| इससे 20 से 25 सकर्स का उत्पादन आसानी से हो जाता है|

उपज: इसकी औसत पैदावार 100 किलोग्राम प्रति पौधा तक हैं|

खलास: इस खजूर की किस्म के फल डोका अवस्था में पीले एवं मीठे होते है| फल का औसत वजन 15. 2 ग्राम तथा कुल घुलनशील ठोस पदार्थ की मात्रा 25 प्रतिशत होती है| फलों की परिपक्वता की अवधि मध्यम होती है|

उपज: इसकी औसत पैदावार 75 किलोग्राम प्रति पौधा तक हैं|

हलावी: इस खजूर की किस्म के फल डोका अवस्था में पीले रंग के एवं मीठे होते हैं और उनमें कसैलापन नगण्य होता है| फल का औसत वनज 12.6 ग्राम तथा कुल घुलनशील ठोस पदार्थ 31 प्रतिशत होता हैं| इस किस्म के फल जल्दी पककर तैयार हो जाते हैं|

उपज: इसकी औसत पैदावार 90 किलोग्राम प्रति पौधा तक हैं|

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जाहिदी: इस किस्म के फल डोका अवस्था में पीले एवं कसैले होते हैं| फल काफी ठोस तथा उनका छिलका काफी चिकना एवं सख्त होता हैं, जिससे फल वर्षा होने पर आसानी से खराब नहीं होते है| इन गुणों के कारण इसके फलों के पिण्ड अच्छे बनते है| फल का औसत वजन 10.1 ग्राम तथा कुल घुलनशील ठोस पर्दाथ की मात्रा 35.5 प्रतिशत होती है| फल देरी से पककर तैयार होते है|

उपज: इसकी औसत पैदावार 125 किलोग्राम प्रति पौधा तक हैं|

खदरावी: इस खजूर की किस्म के फल डोका अवस्था में पीला हरापन लिए होते हैं तथा कसैले होते हैं| फल का औसत वजन 12.9 ग्राम तथा कुल घुलनशील ठोस पदार्थ की मात्रा 36 प्रतिशत होती है| फलों की परिपक्वता की अवधि मध्यम होती है| डोका अवस्था व उसके बाद की अवस्थाओं में फलों को वर्ष एवं अधिक वातावरणीय नमी से बहुत अधिक हानि होती है|

शामरान: इस किस्म के फल डोका अवस्था में निचले सिरे पर हल्की बैंगनी झांई लिए पीले होते है| इस अवस्था में फल कसैले होते हैं| फल का औसत वजन 13.3 ग्राम तथा उसमें कुल घुलनशील ठोस पदार्थ की मात्रा 34.5 प्रतिशत हैं| फलों की परिपक्वता की अवधि मध्यम होती है|

उपज: इसकी औसत पैदावार 100 किलोग्राम प्रति पौधा तक हैं|

खुजी: इस खजूर की किस्म के फल डोका अवस्था में लाल रंग के तथा मीठे होते है| फल का गूदा कुरकुरा तथा स्वादिस्ट होता है| फल का औसत वनज 10.2 ग्राम तथा उनमें कुल घुलनशील ठोस पदार्थ की मात्रा 43 प्रतिशत होती है। फल जल्दी पककर तैयार हो जाते हैं|

उपज: इसकी औसत पैदावार 50 किलोग्राम प्रति पौधा तक हैं|

जगलूल: इस खजूर की किस्म के फल डोका अवस्था में लाल रंग के तथा कसैले होते है| फल का औसत वजन 10.7 ग्राम तथा कुल घुलनशील ठोस पदार्थ की मात्रा 28 प्रतिशत होती है| फल देरी से पककर तैयार होते हैं|

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