
यूपीएससी सिलेबस की पूरी समझ यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा (CSE) को पास करने के लिए एक अत्यंत महत्वपूर्ण मील का पत्थर है| सिविल सेवा परीक्षा, भारत में संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) द्वारा विभिन्न नामित पदों जैसे भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS), भारतीय पुलिस सेवा (IPS), भारतीय विदेश सेवा ( IFS), भारतीय राजस्व सेवा (IRS) और संबद्ध सेवाएं की भर्ती के लिए आयोजित एक राष्ट्रव्यापी परीक्षा है| सिविल सेवा परीक्षा को भारत की सबसे कठिन परीक्षाओं में से एक माना जाता है|
इसलिए आईएएस परीक्षा को सफलतापूर्वक पास करने में सक्षम होने के लिए उम्मीदवारों को यूपीएससी के लिए नवीनतम आईएएस अर्थात सिविल सेवा परीक्षा (CSE) पाठ्यक्रम को विस्तार से जानना चाहिए| अपनी यूपीएससी सिविल सेवा तैयारी को आसान बनाने के लिए यह अनुशंसा की जाती है कि आप भविष्य के संदर्भ के लिए यूपीएससी पाठ्यक्रम में शामिल विषयों की सूक्ष्मता से जाँच करें| इस लेख में हमने निचे यूपीएससी प्रारंभिक और मुख्य परीक्षा दोनों के लिए सिलेबस पर चर्चा की है| परीक्षा पैटर्न, अंकन योजना और साक्षात्कार के बारे में जानने के लिए यहाँ पढ़ें- सिविल सेवा परीक्षा पैटर्न, अंकन योजना और साक्षात्कार
सिविल सेवा प्रारंभिक और मुख्य परीक्षा सिलेबस
यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा (IAS Exam) दो चरणों में आयोजित की जाती है| सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा या यूपीएससी प्रारंभिक परीक्षा मुख्य परीक्षा के लिए उम्मीदवारों के चयन के लिए एक वस्तुनिष्ठ प्रकार की परीक्षा है| सिविल सेवा मुख्य परीक्षा या यूपीएससी मुख्य परीक्षा में आधिकारिक अधिसूचना में उल्लिखित विभिन्न सेवाओं और पदों के लिए उम्मीदवारों के चयन के लिए लिखित परीक्षा और साक्षात्कार शामिल हैं| परीक्षा की प्रारंभिक और मुख्य परीक्षा से लेकर व्यक्तित्व विकास परीक्षा या साक्षात्कार तक की पूरी प्रक्रिया को पूरा होने में लगभग एक वर्ष का समय लगता है| परीक्षा की प्रारंभिक और मुख्य परीक्षा का सिलेबस इस प्रकार है, जैसे-
सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा सिलेबस
यूपीएससी सिविल सेवा (IAS) प्रारंभिक परीक्षा के पाठ्यक्रम पर जाने से पहले, आइए प्रारंभिक परीक्षा की योजना पर एक नज़र डालते हैं| प्रत्येक पेपर की समय अवधि दो घंटे है| यूपीएससी सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा का पाठ्यक्रम नैतिकता पाठ्यक्रम को छोड़कर मुख्य परीक्षा का संक्षिप्त रूप है| प्रीलिम्स परीक्षा में 200 अंकों के दो अनिवार्य बहुविकल्पीय-प्रश्न आधारित प्रश्नपत्र होते हैं|
जहाँ उम्मीदवारों को विकल्पों में से सही उत्तर को चिह्नित करने की आवश्यकता होती है| सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा में दो पेपर होते हैं| सामान्य अध्ययन पेपर I, सामान्य अध्ययन पेपर- II (सीएसएटी – केवल क्वालिफाइंग प्रकृति) का है| यूपीएससी अधिसूचना में दिया गया प्रारंभिक पाठ्यक्रम है| इस प्रकार है, जैसे-
प्रश्न पत्र – I- (200 अंक) अवधि : दो घंटे-
1. राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय महत्व की सामयिक घटनाएं|
2. भारत का इतिहास और भारतीय राष्ट्रीय आन्दोलन|
3. भारत एवं विश्व भूगोल – भारत एवं विश्व का प्राकृतिक, सामाजिक, आर्थिक भूगोल|
4. भारतीय राज्यतन्त्र और शासन – संविधान, राजनैतिक प्रणाली, पंचायती राज, लोक नीति, अधिकारों संबंधी मुद्दे, आदि|
5. आर्थिक और सामाजिक विकास – सतत विकास, गरीबी, समावेशन, जनसांख्यिकी, सामाजिक क्षेत्र में की गई पहल आदि|
6. पर्यावरणीय पारिस्थितिकी जैव-विविधता और मौसम परिवर्तन संबंधी सामान्य मुद्दे, जिनके लिए विषयगत विशेषज्ञता आवश्यक नहीं है|
7. सामान्य विज्ञान|
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प्रश्न पत्र – II- (200 अंक) अवधि : दो घंटे-
1. बोधगम्यता|
2. संचार कौशल सहित अंतर – वैयक्तिक कौशल|
3. तार्किक कौशल एवं विश्लेषणात्मक क्षमता|
4. निर्णय लेना और समस्या समाधान|
5. सामान्य मानसिक योग्यता|
6. आधारभूत संख्यनन (संख्याएं और उनके संबंध, विस्तार क्रम आदि) (दसवीं कक्षा का स्तर), आंकड़ों का निर्वचन (चार्ट, ग्राफ, तालिका, आंकड़ों की पर्याप्तता आदि – दसवीं कक्षा का स्तर)|
टिप्पणी 1: सिविल सेवा (प्रारंभिक) परीक्षा का पेपर-II, अर्हक पेपर होगा जिसके लिए न्यूनतम अर्हक अंक 33% निर्धारित किए गए हैं|
टिप्पणी 2: प्रश्न बहुविकल्पीय, वस्तुनिष्ठ प्रकार के होंगे|
टिप्पणी 3: मूल्यांकन के प्रयोजन से उम्मीदवार के लिए यह अनिवार्य है कि वह सिविल सेवा (प्रारंभिक) परीक्षा के दोनों पेपरों में सम्मिलित हो| यदि कोई उम्मीदवार सिविल सेवा (प्रारंभिक) परीक्षा के दोनों पेपरों में सम्मिलित नहीं होता है तब उसे अयोग्य ठहराया जाएगा|
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सिविल सेवा मुख्य परीक्षा सिलेबस
सिविल सेवा परीक्षा मुख्य परीक्षा का उद्देश्य उम्मीदवारों के समग्र बौद्धिक गुणों तथा उनके गहन ज्ञान का आकलन करना है, मात्र उनकी सूचना के भंडार तथा स्मरण शक्ति का आकलन करना नहीं| सामान्य अध्ययन के प्रश्न-पत्रों (प्रश्न-पत्र-II से प्रश्न-पत्र-V) के प्रश्नों का स्वरूप तथा इनका स्तर ऐसा होगा कि कोई भी सुशिक्षित व्यक्ति बिना किसी विशेष अध्ययन के इनका उत्तर दे सके|
प्रश्न ऐसे होंगे जिनसे विविध विषयों पर उम्मीदवार की सामान्य जानकारी का परीक्षण किया जा सके और जो सिविल सेवा में कैरियर से संबंधित होंगे| प्रश्न इस प्रकार के होंगे जो सभी प्रासंगिक विषयों के बारे में उम्मीदवार की आधारभूत समझ तथा परस्पर-विरोधी सामाजिक-आर्थिक लक्ष्यों, उद्देश्यों और मांगों का विश्लेषण तथा इन पर दृष्टिकोण अपनाने की क्षमता का परीक्षण करें| उम्मीदवार संगत, सार्थक तथा सारगर्भित उत्तर दें|
परीक्षा के लिए वैकल्पिक विषय के प्रश्न-पत्रों (प्रश्न-पत्र-VI तथा प्रश्न-पत्र-VII) के पाठ्यक्रम का स्तर मुख्य रूप से ऑनर्स डिग्री स्तर अर्थात् स्नातक डिग्री से ऊपर और स्नातकोत्तर (मास्टर्स) डिग्री से निम्नतर स्तर का है| इंजीनियरी, चिकित्सा विज्ञान और विधि के मामले में प्रश्न-पत्र का स्तर स्नातक की डिग्री के स्तर का है| सिविल सेवा (प्रधान) परीक्षा की योजना में सम्मिलित प्रश्न-पत्रों का पाठ्यक्रम निम्नानुसार है, जैसे-
भारतीय भाषाओं और अंग्रेजी पर अर्हक प्रश्न पत्र
इस प्रश्न पत्र का उद्देश्य अंग्रेजी तथा संबंधित भारतीय भाषा में अपने विचारों को स्पष्ट तथा सही रूप में प्रकट करना तथा गंभीर तर्कपूर्ण गद्य को पढ़ने और समझने में उम्मीदवार की योग्यता की परीक्षा करना है| सिविल सेवा परीक्षा प्रश्न पत्रों का स्वरूप आमतौर पर निम्न प्रकार का होगा, जैसे-
1. दिए गए गद्यांशों को समझना
2. संक्षेपण
3. शब्द प्रयोग तथा शब्द भंडार
4. लघु निबंध|
भारतीय भाषाएं
1. दिए गए गद्यांशों को समझना
2. संक्षेपण
3. शब्द प्रयोग तथा शब्द भंडार
4. लघु निबंध
5. अंग्रेजी से भारतीय भाषा तथा भारतीय भाषा से अंग्रेजी में अनुवाद|
टिप्पणी 1: भारतीय भाषाओं और अंग्रेजी के प्रश्न पत्र मैट्रिकुलेशन या समकक्ष स्तर के होंगे, जिनमें केवल अर्हता प्राप्त करनी है| इन प्रश्न पत्रों में प्राप्तांक योग्यता क्रम के निर्धारण में नहीं गिने जाएंगे|
टिप्पणी 2: अंग्रेजी तथा भारतीय भाषाओं के प्रश्न पत्रों के उत्तर उम्मीदवारों को अंग्रेजी तथा संबंधित भारतीय भाषा में देने होंगे (अनुवाद को छोड़कर)|
प्रश्न पत्र – I- निबंध-
उम्मीदवार को विविध विषयों पर निबंध लिखना होगा| उनसे अपेक्षा की जाएगी कि वे निबंध के विषय पर ही केन्द्रित रहें तथा अपने विचारों को सुनियोजित रूप से व्यक्त करें और संक्षेप में लिखें| प्रभावी और सटीक अभिव्यक्ति के लिए अंक प्रदान किए जाएंगे|
प्रश्न पत्र – ॥- सामान्य अध्ययन-I : भारतीय विरासत और संस्कृति, विश्व का इतिहास एवं भूगोल और समाज-
1. भारतीय संस्कृति में प्राचीन काल से आधुनिक काल तक के कला के रूप, साहित्य और वास्तुकला के मुख्य पहलू शामिल होंगे|
2. 18वीं सदी के लगभग मध्य से लेकर वर्तमान समय तक का आधुनिक भारतीय इतिहासमहत्वपूर्ण घटनाएं, व्यक्तित्व, विषय|
3. स्वतंत्रता संग्राम- इसके विभिन्न चरण और देश के विभिन्न भागों से इसमें अपना योगदान देने वाले महत्वपूर्ण व्यक्ति/उनका योगदान|
4. स्वतंत्रता के पश्चात देश के अंदर एकीकरण और पुनर्गठन|
5. विश्व के इतिहास में 18वीं सदी की घटनाएं यथा औद्योगिक क्रांति, विश्व युद्ध, राष्ट्रीय सीमाओं का पुन: सीमांकन, उपनिवेशवाद, उपनिवेशवाद की समाप्ति, राजनीतिक दर्शन शास्त्र जैसे साम्यवाद, पूंजीवाद, समाजवाद आदि शामिल होंगे, उनके रूप और समाज पर उनका प्रभाव|
6. भारतीय समाज की मुख्य विशेषताएं, भारत की विविधता|
7. महिलाओं की भूमिका और महिला संगठन, जनसंख्या एवं सम्बद्ध मुद्दे, गरीबी और विकासात्मक विषय, शहरीकरण, उनकी समस्याएं और उनके रक्षोपाय|
8. भारतीय समाज पर भूमंडलीकरण का प्रभाव|
9. सामाजिक सशक्तीकरण, सम्प्रदायवाद, क्षेत्रवाद और धर्म-निरपेक्षता|
10. विश्व के भौतिक-भूगोल की मुख्य विशेषताएं|
11. विश्वभर के मुख्य प्राकृतिक संसाधनों का वितरण (दक्षिण एशिया और भारतीय उपमहाद्वीप को शामिल करते हुए), विश्व (भारत सहित) के विभिन्न भागों में प्राथमिक, द्वितीयक और तृतीयक क्षेत्र के उद्योगों को स्थापित करने के लिए जिम्मेदार कारक|
12. भूकंप, सुनामी, ज्वालामुखीय हलचल, चक्रवात आदि जैसी महत्वपूर्ण भू-भौतिकीय घटनाएं, भूगोलीय विशेषताएं और उनके स्थान-अति महत्वपूर्ण भूगोलीय विशेषताओं (जल-स्रोत और हिमावरण सहित) और वनस्पति एवं प्राणि-जगत में परिवर्तन और इस प्रकार के परिवर्तनों के प्रभाव आदि|
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प्रश्न पत्र – III- सामान्य अध्ययन – II : शासन व्यवस्था, संविधान शासन-प्रणाली, सामाजिक न्याय तथा अंतर्राष्ट्रीय संबंध-
1. भारतीय संविधान-ऐतिहासिक आधार, विकास, विशेषताएं, संशोधन, महत्वपूर्ण प्रावधान और बुनियादी संरचना|
2. संघ एवं राज्यों के कार्य तथा उत्तरदायित्व, संघीय ढांचे से संबंधित विषय एवं चुनौतियां, स्थानीय स्तर पर शाक्तियों और वित्त का हस्तांतरण और उसकी चुनौतियां|
3. विभिन्न घटकों के बीच शक्तियों का पृथक्करण, विवाद निवारण तंत्र तथा संस्थान|
4. भारतीय संवैधानिक योजना की अन्य देशों के साथ तुलना|
5. संसद और राज्य विधायिका – संरचना, कार्य, कार्य-संचालन, शक्तियां एवं विशेषाधिकार और इनसे उत्पन्न होने वाले विषय|
6. कार्यपालिका और न्यायपालिका की संरचना, संगठन और कार्य – सरकार के मंत्रालय एवं विभाग, प्रभावक समूह और औपचारिक/अनौपचारिक संघ तथा शासन प्रणाली में उनकी भूमिका|
7. जन प्रतिनिधित्व अधिनियम की मुख्य विशेषताएं|
8. विभिन्न संवैधानिक पदों पर नियुक्ति और विभिन्न संवैधानिक निकायों की शक्तियां, कार्य और उत्तरदायित्व|
9. सांविधिक, विनियामक और विभिन्न अर्ध-न्यायिक निकाय|
10. सरकारी नीतियों और विभिन्न क्षेत्रों में विकास के लिए हस्तक्षेप और उनके अभिकल्पन तथा कार्यान्वयन के कारण उत्पन्न विषय|
11. विकास प्रक्रिया तथा विकास उद्योग – गैर सरकारी संगठनों, स्वयं सहायता समूहों, विभिन्न समूहों और संघों, दानकर्ताओं, लोकोपकारी संस्थाओं, संस्थागत एवं अन्य पक्षों की भूमिका|
12. केन्द्र एवं राज्यों द्वारा जनसंख्या के अति संवेदनशील वर्गों के लिए कल्याणकारी योजनाएं और इन योजनाओं का कार्य-निष्पादन, इन अति संवेदनशील वर्गों की रक्षा एवं बेहतरी के लिए गठित तंत्र, विधि, संस्थान एवं निकाय|
13. स्वास्थ्य, शिक्षा, मानव संसाधनों से संबंधित सामाजिक क्षेत्र/सेवाओं के विकास और प्रबंधन से संबंधित विषय|
14. गरीबी और भूख से संबंधित विषय|
15. शासन व्यवस्था, पारदर्शिता और जवाबदेही के महत्वपूर्ण पक्ष, ई-गवर्नेस-अनुप्रयोग, मॉडल, सफलताएं, सीमाएं और संभावनाएं; नागरिक चार्टर, पारदर्शिता एवं जवाबदेही और संस्थागत तथा अन्य उपाय|
16. लोकतंत्र में सिविल सेवाओं की भूमिका|
17. भारत एवं इसके पड़ोसी-संबंध|
18. द्विपक्षीय, क्षेत्रीय और वैश्विक समूह और भारत से संबंधित और/अथवा भारत के हितों को प्रभावित करने वाले करार|
19. भारत के हितों, भारतीय परिदृश्य पर विकसित तथा विकासशील देशों की नीतियों तथा राजनीति का प्रभाव|
20. महत्वपूर्ण अंतर्राष्ट्रीय संस्थान, संस्थाएं और मंच – उनकी संरचना, अधिदेश आदि|
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प्रश्न पत्र – IV- सामान्य अध्ययन – III : प्रौद्योगिकी, आर्थिक विकास, जैव विविधता, पर्यावरण, सुरक्षा तथा आपदा प्रबंधन-
1. भारतीय अर्थव्यवस्था तथा योजना, संसाधनों को जुटाने, प्रगति, विकास तथा रोजगार से संबंधित विषय|
2. समावेशी विकास तथा इससे उत्पन्न विषय|
3. सरकारी बजट|
4. मुख्य फसलें – देश के विभिन्न भागों में फसलों का पैटर्न – सिंचाई के विभिन्न प्रकार एवं सिंचाई प्रणाली-कृषि उत्पाद का भंडारण, परिवहन तथा विपणन, संबंधित विषय और बाधाएं; किसानों की सहायता के लिए ई-प्रौद्योगिकी|
5. प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष कृषि सहायता तथा न्यूनतम समर्थन मूल्य से संबंधित विषय; जन वितरण प्रणाली-उद्देश्य, कार्य, सीमाएं, सुधार; बफर स्टॉक तथा खाद्य सुरक्षा संबंधी विषय; प्रौद्योगिकी मिशन; पशु-पालन संबंधी अर्थशास्त्र|
6. भारत में खाद्य प्रसंस्करण एवं संबंधित उद्योग – कार्यक्षेत्र एवं महत्व, स्थान, ऊपरी और नीचे की अपेक्षाएं, आपूर्ति श्रृंखला प्रबंधन|
7. भारत में भूमि सुधार|
8. उदारीकरण का अर्थव्यवस्था पर प्रभाव, औद्योगिक नीति में परिवर्तन तथा औद्योगिक विकास पर इनका प्रभाव|
9. बुनियादी ढांचा : ऊर्जा, बंदरगाह, सड़क, विमानपत्तन, रेलवे आदि|
10. निवेश मॉडल|
11. विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी – विकास एवं अनुप्रयोग और रोजमर्रा के जीवन पर इसका प्रभाव|
12. विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी में भारतीयों की उपलब्धियां; देशज रूप से प्रौद्योगिकी का विकास और नई प्रौद्योगिकी का विकास|
13. सूचना प्रौद्योगिकी, अंतरिक्ष, कम्प्यूटर, रोबोटिक्स, नैनो-टैक्नोलॉजी, बायो-टैक्नोलॉजी और बौद्धिक सम्पदा अधिकारों से संबंधित विषयों के संबंध में जागरूकता|
14. संरक्षण, पर्यावरण प्रदूषण और क्षरण, पर्यावरण प्रभाव का आकलन|
15. आपदा और आपदा प्रबंधन|
16. विकास और फैलते उग्रवाद के बीच संबंध|
17. आंतरिक सुरक्षा के लिए चुनौती उत्पन्न करने वाले शासन विरोधी तत्वों की भूमिका|
18. संचार नेटवर्क के माध्यम से आंतरिक सुरक्षा को चुनौती, आंतरिक सुरक्षा चुनौतियों में मीडिया और सामाजिक नेटवर्किंग साइटों की भूमिका , साइबर सुरक्षा की बुनियादी बातें , धन-शोधन और इसे रोकना|
19. सीमावर्ती क्षेत्रों में सुरक्षा चुनौतियां एवं उनका प्रबंधन – संगठित अपराध और आतंकवाद के बीच संबंध|
20. विभिन्न सुरक्षा बल और संस्थाएं तथा उनके अधिदेश आदि|
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प्रश्न पत्र – V- सामान्य अध्ययन – IV : नीतिशास्त्र, सत्यनिष्ठा और अभिरुचि-
इस प्रश्न-पत्र में ऐसे प्रश्न शामिल होंगे जो सार्वजनिक जीवन में उम्मीदवारों की सत्यनिष्ठा, ईमानदारी से संबंधित विषयों के प्रति उनकी अभिवृत्ति तथा उनके दृष्टिकोण तथा समाज से आचार-व्यवहार में विभिन्न मुद्दों तथा सामने आने वाली समस्याओं के समाधान को लेकर उनकी मनोवृत्ति का परीक्षण करेंगे| इन आयामों का निर्धारण करने के लिए प्रश्न-पत्रों में किसी मामले के अध्ययन (केस स्टडी) का माध्यम भी चुना जा सकता है| मुख्य रूप से निम्नलिखित क्षेत्रों को कवर किया जाएगा, जैसे-
1. नीतिशास्त्र तथा मानवीय सह-संबंध: मानवीय क्रियाकलापों में नीतिशास्त्र का सार तत्व, इसके निर्धारक और परिणाम; नीतिशास्त्र के आयाम; निजी और सार्वजनिक संबंधों में नीतिशास्त्र|
2. मानवीय मूल्य – महान नेताओं, सुधारकों और प्रशासकों के जीवन तथा उनके उपदेशों से शिक्षा; मूल्य विकसित करने में परिवार, समाज और शैक्षणिक संस्थाओं की भूमिका|
3. अभिवृत्ति: सारांश (कंटेन्ट), संरचना, वृत्ति; विचार तथा आचरण के परिप्रेक्ष्य में इसका प्रभाव एवं संबंध; नैतिक और राजनीतिक अभिरूचि; सामाजिक प्रभाव और धारणा|
4. सिविल सेवा के लिए अभिरूचि तथा बुनियादी मूल्य, सत्यनिष्ठा, भेदभाव रहित तथा गैरतरफदारी, निष्पक्षता, सार्वजनिक सेवा के प्रति समर्पण भाव, कमजोर वर्गों के प्रति सहानुभूति, सहिष्णुता तथा संवेदना|
5. भावनात्मक समझ: अवधारणाएं तथा प्रशासन और शासन व्यवस्था में उनके उपयोग और प्रयोग|
6. भारत तथा विश्व के नैतिक विचारकों तथा दार्शनिकों के योगदान|
7. लोक प्रशासनों में लोक/सिविल सेवा मूल्य तथा नीतिशास्त्र: स्थिति तथा समस्याएं; सरकारी तथा निजी संस्थानों में नैतिक चिंताएं तथा दुविधाएं; नैतिक मार्गदर्शन के स्रोतों के रूप में विधि, नियम, विनियम तथा अंतर्रात्मा; शासन व्यवस्था में नीतिपरक तथा नैतिक मूल्यों का सुदृढ़ीकरण; अंतर्राष्ट्रीय संबंधों तथा निधि व्यवस्था (फंडिंग) में नैतिक मुद्दे; कारपोरेट शासन व्यवस्था|
8. शासन व्यवस्था में ईमानदारी: लोक सेवा की अवधारणा; शासन व्यवस्था और ईमानदारी का दार्शनिक आधार, सरकार में सूचना का आदान-प्रदान और पारदर्शिता, सूचना का अधिकार, नीतिपरक आचार संहिता, आचरण संहिता, नागरिक घोषणा पत्र, कार्य संस्कृति, सेवा प्रदान करने की गुणवत्ता, लोक निधि का उपयोग, भ्रष्टाचार की चुनौतियां|
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वैकल्पिक विषय
सिविल सेवा मुख्य परीक्षा में 25 वैकल्पिक विषय होते हैं और उम्मीदवारों को उनमें से केवल एक को चुनना होता है| वैकल्पिक विषय में 1750 में से 500 अंक हैं| यह कुल परीक्षा का लगभग 30% है| इसलिए उम्मीदवारों को वैकल्पिक विषय का चयन बहुत सावधानी से करने का सुझाव दिया जाता है क्योंकि यह आईएएस अधिकारी बनने के सपने को बना या बिगाड़ सकता है| आईएएस मुख्य वैकल्पिक विषयों की आधिकारिक सूची निम्नलिखित है, जैसे-
क्र.सं. | विषय | क्र.सं. | विषय |
1 | कृषि विज्ञान | 2 | पशुपालन एवं पशु चिकित्सा विज्ञान |
3 | नृविज्ञान | 4 | वनस्पति विज्ञान |
5 | रसायन विज्ञान | 6 | सिविल इंजीनियरी |
7 | वाणिज्य शास्त्र तथा लेखा विधि | 8 | अर्थशास्त्र |
9 | विद्युत इंजीनियरी | 10 | भूगोल |
11 | भू-विज्ञान | 12 | इतिहास |
13 | विधि | 14 | प्रबंधन |
15 | गणित | 16 | यांत्रिक इंजीनियरी |
17 | चिकित्सा विज्ञान | 18 | दर्शन शास्त्र |
19 | भौतिकी | 20 | राजनीति विज्ञान तथा अन्तर्राष्ट्रीय संबंध |
21 | मनोविज्ञान | 22 | लोक प्रशासन |
23 | समाज शास्त्र | 24 | सांख्यिकी |
25 | प्राणि विज्ञान |
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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
प्रश्न- सिविल सेवा परीक्षा के लिए यूपीएससी पाठ्यक्रम क्या है?
उत्तर- यूपीएससी सिलेबस को हर साल आईएएस अधिसूचना में अधिसूचित किया जाता है| संक्षेप में, हम कह सकते हैं कि इसमें वह सब कुछ शामिल है जो राष्ट्र और उसके नागरिकों से जुड़ा और प्रासंगिक है|
प्रश्न- यूपीएससी सिलेबस में कितने वैकल्पिक विषय होते हैं?
उत्तर- आईएएस परीक्षा में कुल विषयों की संख्या 48 है| यूपीएससी सभी उम्मीदवारों को हर साल आईएएस अधिसूचना में अधिसूचित वैकल्पिक विषयों की सूची से अपने विषय का चयन करने का पूरा अवसर प्रदान करता है| चुनने के लिए 25 विषय और 23 साहित्य भाषा विषय हैं|
प्रश्न- यूपीएससी आईएएस सिलेबस में कितने भाषा साहित्य विषय हैं?
उत्तर- यूपीएससी पाठ्यक्रम में 23 साहित्य विषय हैं| उम्मीदवार किसी भी साहित्य विषय का विकल्प चुन सकते हैं| विषयों की सूची अवलोकनार्थ ऊपर दी गई है|
प्रश्न- यूपीएससी का सिलेबस कैसे तैयार करें?
उत्तर- आईएएस का सिलेबस सही रणनीति से ही तैयार किया जा सकता है| उम्मीदवारों को पहले मूल सिद्धांतों का अध्ययन करना होगा और फिर विषयों के आवेदन भाग के लिए जाना होगा| विषयों को आपस में जोड़ना आईएएस परीक्षा में अधिक अंक प्राप्त करने की कुंजी है|
प्रश्न- यूपीएससी सिलेबस को कवर करने में कितना समय लगेगा?
उत्तर- आईएएस पाठ्यक्रम को लगातार प्रयास से 1.5 से 2 साल के समय में कवर किया जा सकता है| आईएएस टॉपर्स और संरक्षक हमेशा मुख्य पाठ्यक्रम को पहले कवर करने का सुझाव देते हैं|
प्रश्न- यूपीएससी आईएएस सिलेबस तैयार करने के स्रोत क्या हैं?
उत्तर- आईएएस पाठ्यक्रम में दिए गए विषयों को मानक पाठ्यपुस्तकों के माध्यम से कवर किया जाना चाहिए| एनसीईआरटी की किताबों से शुरुआत करते हुए, उम्मीदवारों को मानक संदर्भ पुस्तकों से विषयों को तैयार करना चाहिए और इसे समाचार पत्रों से जोड़ना चाहिए|
प्रश्न- क्या यूपीएससी सिलेबस में सब कुछ शामिल है?
उत्तर- आईएएस पाठ्यक्रम में वह सब कुछ शामिल है जो भारत और भारतीय नागरिकों के लिए प्रासंगिक है| लेकिन विज्ञान और प्रौद्योगिकी क्षेत्र के मामले में, पाठ्यक्रम की कोई सीमा नहीं है| पिछले वर्ष के प्रश्न पत्र पाठ्यक्रम की सीमाओं का पता लगाने में काफी मदद कर सकते हैं|
प्रश्न- आईएएस पाठ्यक्रम में करेंट अफेयर्स की क्या भूमिका है?
उत्तर- आईएएस की तैयारी के लिए करेंट अफेयर्स बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है| पाठ्यक्रम के सभी विषयों को वर्तमान घटनाओं राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय घटनाओं से जोड़ने की आवश्यकता है| करेंट अफेयर्स की जड़ें स्थिर सामान्य अध्ययन विषयों में होनी चाहिए|
प्रश्न- यूपीएससी आईएएस परीक्षा के लिए कौन से विषय सबसे अच्छे हैं?
उत्तर- इन सवालों का कोई सही जवाब नहीं है| हर साल अलग होता है और हर साल हर विषय का उत्तीर्ण प्रतिशत अलग होता है| लेकिन प्रवृत्ति का विश्लेषण करने के बाद, हम कह सकते हैं कि निम्नलिखित विषयों में सबसे अधिक सफलता अनुपात है – कानून, चिकित्सा विज्ञान, मनोविज्ञान, नृविज्ञान, भूगोल|
प्रश्न- आईएएस पाठ्यक्रम के विषयों का विवरण कोई कहां से प्राप्त कर सकता है?
उत्तर- यूपीएससी अधिसूचना में प्रारंभिक परीक्षा का पाठ्यक्रम अच्छी तरह से परिभाषित नहीं है| लेकिन आईएएस मुख्य परीक्षा पाठ्यक्रम बहुत अच्छी तरह से परिभाषित है और अधिसूचना में ही समझाया गया है| उम्मीदवारों को मुख्य पाठ्यक्रम को पढ़ने, समझने, सीखने और जानने की जरूरत है|
प्रश्न- क्या यूपीएससी का सिलेबस हर साल बदलता है?
उत्तर- नहीं, आईएएस पाठ्यक्रम बहुत स्थिर है और पाठ्यक्रम को बदलने से पहले, यूपीएससी को कार्मिक और प्रशिक्षण मंत्रालय से अनुमोदन लेने की आवश्यकता है|
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